🌾 मिट्टी 🌱

मिट्टी के बने हम भी। मिट्टी के बने तुम भी।। मिट जाना एक दिन हम-को भी है। मिट जाना एक दिन तुम-को भी।। याँ चिता बन कर जल जाओगे। याँ क़फन बन कर गढ़ जाओगे।। मिट्टी में तुम ऐसे भी मिल जाओगे। मिट्टी में तुम वैसे भी मिल जाओगे।। मिट्टी न बोले, "मैं हिन्दु की... Continue Reading →

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💦 वर्षा 💦

प्यास भी बुझाए, अश्रु भी छिपाए। पुष्प भी चमकाए, मोर को भी नचाए।। तपन को मिटाए, इन्द्रधनुष को रङ्ग जाए। फसल भी लॅहलाए, हर किसान भी मुस्काए।।   परन्तु उन बून्दों का अस्तित्व क्या?   आकाश में मेघों से बॅहे, और पृथ्वि पर गटर में मिल जाए।     +रोहन राम वासवाणि+

कश्मकश

इस अभियांत्रिकी (Engineering) की भी कैसी कश्मकश? पता ही चल रहा कि ज़िंदगी इम्तेहान ले रही है याँ इम्तेहान ज़िंदगी से रहे हैं।

Lag Life

"People out there are achieving laurels, falling into relationships or travelling the world… And here I am, busy in figuring out which applications to uninstall so that my cell-phone starts working faster."          

राहों तले

"साँस लेना भूल गए हम, सिसक-ती आहों तले। स्वप्न जो देखे, सारे टूटे; इन्ही दो निगाहों तले। जीवन की यात्रा में भट-के तो ऐसे भट-के, कि अब खो गई है मनज़िल ही, कहीं राहों तले।"   +रोहन राम वासवाणि+

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